बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए ट्रेन हादसे ने रेलवे सिस्टम की लापरवाहियों की पोल खोल दी है। प्रारंभिक जांच में जो बातें सामने आई हैं, उन्होंने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जिस लोको पायलट को हादसे के वक्त ट्रेन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वह साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल हुआ था — इसके बावजूद उसे ड्यूटी पर तैनात कर दिया गया।
जून में साइको टेस्ट में फेल हुआ था लोको पायलट
जानकारी के अनुसार, लोको पायलट विद्यासागर 19 जून को हुए रेलवे के साइको टेस्ट में पास नहीं हो सके थे। यह टेस्ट पैसेंजर ट्रेन चलाने के लिए अनिवार्य होता है।
फिर भी विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए उन्हें मेमू लोकल ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी दे दी।
इस टेस्ट में चालक की मानसिक स्थिरता, निर्णय लेने की क्षमता और आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया देने की योग्यता का आकलन किया जाता है।
रेलवे को थी जानकारी, फिर भी दी गई जिम्मेदारी
सबसे हैरानी की बात यह है कि रेलवे प्रशासन को विद्यासागर के टेस्ट में फेल होने की जानकारी पहले से थी।
इसके बावजूद, उन्हें पैसेंजर ट्रेन चलाने की अनुमति दे दी गई — जो कि सीधा नियम उल्लंघन है।
अब इस गंभीर चूक की जिम्मेदारी तय करने के लिए रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) ने जांच तेज कर दी है और 19 कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है।
11 लोगों की गई थी जान
गौरतलब है कि 4 नवंबर को गेवरारोड स्टेशन के पास मेमू लोकल और मालगाड़ी की जोरदार टक्कर हुई थी, जिसमें लोको पायलट विद्यासागर समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी।
शुरुआती रिपोर्टों में हादसे की वजह ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की तकनीकी खामी बताई गई थी, लेकिन अब जांच में स्पष्ट हो गया है कि मानव त्रुटि (ह्यूमन एरर) भी इस दुर्घटना की बड़ी वजह रही।
पूछताछ जारी
6 नवंबर को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) ने इस मामले में 10 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की थी।
शुक्रवार को शेष कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
