11 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का प्रदर्शन, मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक असर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित है। राज्य के हजारों कर्मचारी एक साथ सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। यह आंदोलन छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले हो रहा है। मंत्रालय, कलेक्टर कार्यालय, नगर निगम और अन्य विभागों में कामकाज ठप पड़ गया है।
क्या हैं कर्मचारियों की मांगें?
फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर 22 अगस्त को जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
- पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
- प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर संपूर्ण सेवा लाभ दिया जाए।
- पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए।
- सहायक शिक्षक और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
- नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन व पदोन्नति मिले।
- अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10% सीलिंग शिथिलीकरण किया जाए।
- प्रदेश में कैशलेश चिकित्सा सुविधा लागू हो।
- अर्जित अवकाश का नगदीकरण 300 दिन तक हो।
- दैनिक, अनियमित एवं संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
अधिकारियों ने भी दिया आंदोलन का समर्थन
राजपत्रित अधिकारी संघ की आपात बैठक इंद्रावती भवन में हुई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष कमल वर्मा ने अधिकारियों को आंदोलन की रणनीति बताई और इसे सफल बनाने का आह्वान किया। उनका कहना है कि सरकार की उदासीनता कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है।
