Chhattisgarh

दंतेवाड़ा CCTV टेंडर पर उठे सवाल,पांच बोलीदाता क्वालिफाई फिर भी रद्द हुआ टेंडर, 12 दिन बाद नई शर्तों के साथ निकली निविदा

दंतेवाड़ा CCTV टेंडर पर उठे सवाल,पांच बोलीदाता क्वालिफाई फिर भी रद्द हुआ टेंडर, 12 दिन बाद नई शर्तों के साथ निकली निविदा

रायपुर/दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा पुलिस की CCTV व्यवस्था के रिपेयर और मेंटेनेंस से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पहले टेंडर में सात बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया था, जिनमें से पांच तकनीकी रूप से पात्र पाए गए। इसके बावजूद वित्तीय बोली की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले ही टेंडर रद्द कर दिया गया। इसके 12 दिन बाद 30 सितंबर को CCTV से जुड़ा नया टेंडर जारी किया गया, जिसमें OEM और पिछली कार्यक्षमता से जुड़ी अतिरिक्त शर्तें शामिल हैं।

25 अगस्त को जारी हुआ था पहला टेंडर

दंतेवाड़ा एसपी कार्यालय ने 25 अगस्त 2026 को GeM Bid No. GEM/2026/B/7961810 जारी किया था। करीब 54.15 लाख रुपये की अनुमानित लागत वाले इस टेंडर का उद्देश्य मौजूदा Integrated Security and Surveillance System के एक साल के AMC से जुड़ा था।

17 सितंबर को इसकी अंतिम तारीख थी और 18 सितंबर को तकनीकी प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई होनी थी। GeM के रिकॉर्ड में अब यह टेंडर Cancelled दिख रहा है।

पहले टेंडर में कुल सात sellers ने हिस्सा लिया था। तकनीकी मूल्यांकन में पांच Qualified और दो Disqualified हुए। यानी वित्तीय प्रतिस्पर्धा के लिए पांच बोलीदाता मौजूद थे, लेकिन इसके बाद टेंडर ही रद्द कर दिया गया।

12 दिन बाद आया दूसरा टेंडर

पहले टेंडर के रद्द होने के 12 दिन बाद 30 सितंबर 2026 को दंतेवाड़ा एसपी कार्यालय ने GEM/2026/B/8101747 के नाम से नई निविदा जारी की। इसमें CCTV System से संबंधित 512 units शामिल हैं।

नई निविदा में OEM Authorization Certificate, Past Performance और OEM Annual Turnover जैसी शर्तें रखी गई हैं। इसके अलावा bidder या उसके OEM के लिए पिछले तीन वित्तीय वर्षों में किसी एक वर्ष के दौरान समान या संबंधित श्रेणी के उत्पादों की सरकारी संस्था या PSU को आपूर्ति का अनुभव भी मांगा गया है।

टेंडर रद्द करने के कारण पर सवाल

पहले टेंडर में पांच बोलीदाताओं के तकनीकी रूप से पात्र पाए जाने के बावजूद उसे क्यों रद्द किया गया, इसका विस्तृत कारण उपलब्ध GeM status में दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

नई निविदा में जो अतिरिक्त OEM और past-performance शर्तें जोड़ी गई हैं, वे अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं हैं। CCTV जैसी व्यवस्था में गुणवत्ता, तकनीकी सपोर्ट और उत्पाद की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ऐसी शर्तें रखी जा सकती हैं।

हालांकि सवाल यह है कि पहले टेंडर में पात्र पाए गए पांच बोलीदाता नई शर्तों के तहत भी प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे या नहीं। अगर नई शर्तों के कारण प्रतिस्पर्धा का दायरा काफी सीमित हो जाता है, तो procurement प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने की मंशा साबित नहीं करते। लेकिन पांच बोलीदाताओं के तकनीकी रूप से क्वालिफाई होने के बाद टेंडर रद्द होना और महज 12 दिन बाद बदली हुई पात्रता शर्तों के साथ नई निविदा जारी होना निश्चित तौर पर स्पष्टीकरण की मांग करता है।

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Editor Jamhoora

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