Chhattisgarh

राजधानी में बेहतर पुलिसिंग को लेकर कमिश्नरेट का सेमिनार, कमिश्नर संजीव शुक्ला बोले – जनविश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत

राजधानी में बेहतर पुलिसिंग को लेकर कमिश्नरेट का सेमिनार, कमिश्नर संजीव शुक्ला बोले – जनविश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत

रायपुर।
कमिश्नरी प्रणाली लागू होने के बाद राजधानी रायपुर में पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने के लिए कमिश्नरेट पुलिस लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में सोमवार को रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला (आईपीएस) के नेतृत्व में शंकर नगर स्थित सभागार में एक अहम सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का उद्देश्य कमिश्नरी प्रणाली के अंतर्गत पुलिस की भूमिका, जिम्मेदारियों और आम जनता की अपेक्षाओं को स्पष्ट करना था।

इस सेमिनार में आरक्षक स्तर से लेकर पुलिस कमिश्नर तक कमिश्नरेट रायपुर के सभी अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कमिश्नरेट के सभी प्रमुख जोन अधिकारियों का उनके अधीनस्थ अराजपत्रित अधिकारियों से औपचारिक परिचय भी कराया गया।


जोन अधिकारियों ने साझा की प्राथमिकताएं

सेमिनार में डीसीपी नॉर्थ ज़ोन मयंक गुर्जर, डीसीपी वेस्ट संदीप पटेल और डीसीपी सेंट्रल ज़ोन उमेश प्रसाद गुप्ता ने अपने-अपने जोन की कार्यप्रणाली, कार्यक्षेत्र, प्राथमिकताएं और एसीपी डिवीजनों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार जोन स्तर पर समन्वय और जवाबदेही के साथ काम कर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।


कमिश्नर का संदेश: अधिकार नहीं, भरोसा सबसे अहम

पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि कमिश्नरी सिस्टम का मकसद केवल पुलिस के अधिकार बढ़ाना नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच भरोसे का मजबूत रिश्ता बनाना है।
उन्होंने कहा कि भयमुक्त और सुरक्षित रायपुर तभी संभव है, जब पुलिस संवेदनशील, जवाबदेह और जनहित को प्राथमिकता देने वाली बने।


बेसिक पुलिसिंग पर विशेष जोर

डॉ. शुक्ला ने पुलिसकर्मियों को बेसिक पुलिसिंग का पालन करने के निर्देश देते हुए कहा कि

  • नागरिकों से शालीन और सम्मानजनक व्यवहार
  • शिकायतों को धैर्यपूर्वक सुनना
  • वैधानिक और त्वरित समाधान देना

यही जनविश्वास की असली नींव है।
उन्होंने कहा कि शिकायतों की समीक्षा में यह सामने आया है कि कई मामलों में आम नागरिकों को अपेक्षित सुनवाई नहीं मिल पाती, जिसे गंभीरता से सुधारने की जरूरत है।


विजिबल पुलिसिंग का असली मतलब समझाया

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि विजिबल पुलिसिंग का अर्थ केवल सड़क पर मौजूद रहना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को सुरक्षा का एहसास कराना है। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की सतत निगरानी जरूरी है, ताकि पुलिस की मौजूदगी लोगों के लिए भरोसे का कारण बने, डर का नहीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि

  • अपराधियों के प्रति कानून पूरी सख्ती से लागू होगा
  • वहीं आम नागरिकों के प्रति पुलिस का व्यवहार सहयोगात्मक और मानवीय रहेगा

अनुशासन और व्यवहार पर सख्त संदेश

डॉ. शुक्ला ने पुलिसकर्मियों से स्वच्छ वेशभूषा, अनुशासित कार्यशैली और मर्यादित आचरण अपनाने की अपील की। उन्होंने दो टूक कहा कि अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि सजग और संवेदनशील पुलिस बल ही समाज में विश्वास कायम कर सकता है।


ये अधिकारी रहे मौजूद

सेमिनार में एडिशनल डीसीपी तारकेश्वर पटेल, एडिशनल डीसीपी अर्चना झा, एडिशनल डीसीपी राहुद देव शर्मा, एडिशनल डीसीपी आकाश मरकाम सहित सभी एसीपी और थाना प्रभारी उपस्थित रहे।


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Editor Jamhoora

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