नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बीच चीन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नेपाल का कहना है कि चीन ने ग्लेशियरों की स्थिति, नदियों के जलस्तर और मौसम से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई, जिससे आपदा से निपटने की तैयारियों पर असर पड़ा। हालांकि, चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उसने समय रहते नेपाल को जरूरी मौसम संबंधी चेतावनी दी थी।
नेपाल-तिब्बत में बाढ़ से भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 919 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 903 और तिब्बत में 16 लोगों की मौत बताई गई है। वहीं 7000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हुए हैं।
नेपाल ने चीन से मांगा था लगातार डेटा
नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, मई में काठमांडू में नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को लेकर बैठक हुई थी। नेपाल ने चीन से ग्लेशियरों की गतिविधियों, नदियों के जलस्तर और भारी बारिश से संबंधित आंकड़े साझा करने का अनुरोध किया था।
नेपाल का दावा है कि उसे चीन की ओर से केवल भारी बारिश के पूर्वानुमान से जुड़ी जानकारी मिलती रही, जबकि ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में बदलाव जैसी घटनाओं की रियल टाइम जानकारी की जरूरत थी।
नेपाल अब भारत की तर्ज पर चीन के साथ भी ऐसा तंत्र विकसित करना चाहता है, जिसमें नदियों और मौसम से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े नियमित अंतराल पर साझा किए जा सकें।
चीन ने आरोपों को किया खारिज
नेपाल के आरोपों पर चीन ने सफाई देते हुए उन्हें खारिज कर दिया है। चीन के दूतावास का कहना है कि उसने नेपाल को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई थी।
चीनी पक्ष के मुताबिक, हिमालय का सीमावर्ती क्षेत्र बेहद दुर्गम है और वहां लगातार निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है। चीन ने दावा किया कि घटना से करीब 12 दिन पहले उसके मौसम केंद्र ने नेपाल को ईमेल के माध्यम से भारी बारिश और भूस्खलन जैसी संभावित आपदाओं को लेकर चेतावनी भेजी थी।
अज्ञात शवों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू
भीषण बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में ऐसे शव बरामद हुए हैं, जिनकी पहचान नहीं हो सकी है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण शवों की हालत खराब होने से पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दिनों में 196 अज्ञात शवों को दफनाया जा चुका है, जबकि अन्य शवों के लिए भी बड़ी संख्या में कब्रें तैयार की गई हैं।
9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के मुताबिक, अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत एवं बचाव अभियान के लिए 394 हवाई उड़ानें संचालित की गईं, जिनमें रविवार को हुई 72 उड़ानें भी शामिल हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट वाले प्रभावित क्षेत्रों से भी 279 लोगों को सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से सुरक्षित निकाला गया है। वहीं नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र बलों के करीब 20,618 जवान लगातार राहत और बचाव अभियान में जुटे हुए हैं।
फिलहाल नेपाल में राहत एवं बचाव कार्य जारी है और लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।
