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संवाद में 25 साल पुराने प्रिंटिंग तंत्र पर कार्रवाई, सब्यसाची कर बर्खास्त; 8 प्रिंटरों के बिल से 3.5 करोड़ की कटौती

संवाद में 25 साल पुराने प्रिंटिंग तंत्र पर कार्रवाई, सब्यसाची कर बर्खास्त; 8 प्रिंटरों के बिल से 3.5 करोड़ की कटौती

रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की संस्था ‘संवाद’ में प्रिंटिंग और होर्डिंग से जुड़े मामलों में सरकार ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। करीब 25 साल से प्रिंटिंग विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सब्यसाची कर को सेवा से हटा दिया गया है। इसके साथ ही पुस्तक छपाई में गड़बड़ी पाए जाने पर आठ प्रिंटरों के बिल से करीब 3.5 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।

बताया गया है कि सब्यसाची कर की नियुक्ति को लेकर वर्ष 2011 में जांच समिति ने आपत्ति जताई थी, लेकिन उस समय मामला आगे नहीं बढ़ा। अब पुरानी शिकायतों और विभागीय व्यवस्था की समीक्षा के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

किताबों की छपाई में गड़बड़ी सामने आई

मामला समग्र शिक्षा विभाग की पाठ्यपुस्तकों की छपाई से भी जुड़ा है। 6 फरवरी 2026 को संवाद की ओर से 10 प्रिंटरों को काम दिया गया था। जांच के दौरान आठ प्रिंटरों की ओर से किताबों के आकार, कागज की गुणवत्ता और निर्धारित संख्या को लेकर गड़बड़ी सामने आने की बात कही गई है।

आरोप है कि प्रिंटरों ने सैंपल के दौरान तय मानकों के मुताबिक किताबें प्रस्तुत कीं, लेकिन जिलों में भेजी गई किताबों में कम GSM वाले कागज और छोटे आकार का इस्तेमाल किया गया। साथ ही निर्धारित संख्या से कम किताबें छापे जाने की भी बात सामने आई।

गुप्त सैंपलिंग से पकड़ी गई गड़बड़ी

इस बार गड़बड़ी पकड़ने के लिए किताबों की सप्लाई के दौरान बीच रास्ते में वाहनों से गोपनीय तरीके से सैंपल लिए गए। जांच में आठ प्रिंटरों की आपूर्ति में अनियमितता सामने आने के बाद उनके बिलों से पहली बार सीधे करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की कटौती की गई।

होर्डिंग व्यवस्था पर भी सख्ती

प्रिंटिंग के साथ सरकारी होर्डिंग व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। आरोप है कि कुछ मामलों में निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले सरकारी विज्ञापन हटाकर निजी विज्ञापन लगा दिए जाते थे और इसके बावजूद सरकारी भुगतान का दावा किया जाता था। अब ऐसे मामलों में भुगतान से पहले वास्तविक स्थिति की जांच पर जोर दिया जा रहा है।

वहीं, काम में लापरवाही के आरोप में तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनके जवाब के आधार पर आगे विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

‘संवाद’ में हुई इस कार्रवाई के बाद लंबे समय से चली आ रही प्रिंटिंग और होर्डिंग व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। अब निगरानी, गुणवत्ता जांच और सरकारी भुगतान की प्रक्रिया को और सख्त किए जाने की कवायद शुरू हो गई है।

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Editor Jamhoora

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