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संसद के गेट पर तीखी बहस: राहुल गांधी ने बिट्टू को बताया ‘गद्दार दोस्त’, केंद्रीय मंत्री का पलटवार— “देश के दुश्मनों से नहीं कोई नाता”

संसद के गेट पर तीखी बहस: राहुल गांधी ने बिट्टू को बताया ‘गद्दार दोस्त’, केंद्रीय मंत्री का पलटवार— “देश के दुश्मनों से नहीं कोई नाता”

नई दिल्ली।
संसद परिसर में सोमवार को उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब मकर द्वार पर कांग्रेस सांसद तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू आमने-सामने आ गए। कुछ ही पलों में दोनों के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिली, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस सांसदों की सराहना करते हुए आगे बढ़ते हैं और रवनीत सिंह बिट्टू से हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाते हैं। हालांकि बिट्टू ने हाथ आगे नहीं बढ़ाया। इसी दौरान राहुल गांधी ने उन्हें ‘गद्दार दोस्त’ कहकर संबोधित किया। इस टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने भी तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि उनका “देश के दुश्मनों” से कोई लेना-देना नहीं है।

पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं राहुल-बिट्टू

यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी और रवनीत सिंह बिट्टू के बीच बयानबाजी हुई हो। सितंबर 2024 में भी बिट्टू ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने अमेरिका में सिख समुदाय को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया था कि राहुल गांधी सिख समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उस समय बिट्टू का बयान काफी विवादों में रहा था।

कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू

रवनीत सिंह बिट्टू तीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री की थी। इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से सांसद बने।
खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथ के मुखर विरोधी माने जाने वाले बिट्टू 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें लुधियाना सीट से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से करीब 20 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने उन्हें रेल और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री बनाया।

राजनीतिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि

रवनीत सिंह बिट्टू महज 11 वर्ष के थे, जब उनके पिता का निधन हो गया। 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी।
बताया जाता है कि वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही बिट्टू ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था।

संसद परिसर में हुई इस तकरार ने एक बार फिर सियासी बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग किस मोड़ तक जाती है।


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Editor Jamhoora

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