नई दिल्ली। संसद के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार देर रात अपने आधिकारिक आवास ‘सेवा तीर्थ’ में शीर्ष भाजपा नेतृत्व के साथ हाई लेवल बैठक की। करीब 2 घंटे 45 मिनट (लगभग 3 घंटे) तक चली इस मैराथन बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष मौजूद रहे।
हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक कई राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
संगठन, चुनाव और संभावित कैबिनेट विस्तार पर मंथन
भाजपा सूत्रों के अनुसार, बैठक में संगठन विस्तार, आगामी चुनावी राज्यों की रणनीति, संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार और संसद के मानसून सत्र की तैयारियों पर चर्चा की गई। इसके अलावा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ से जुड़े सुधारों की समीक्षा भी बैठक का हिस्सा रही।
एनसीपी के समर्थन पर भी हुई चर्चा
सूत्रों का दावा है कि बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) से जुड़े राजनीतिक समीकरणों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बताया जा रहा है कि संसद में परिसीमन, महिला आरक्षण समेत अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिए एनसीपी के आठ सांसदों के रुख पर भी चर्चा हुई। हालांकि इस संबंध में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अमित शाह और योगी की मुलाकात भी रही चर्चा में
इस बैठक से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, संगठनात्मक बदलाव और आगामी राजनीतिक रणनीति जैसे विषयों पर चर्चा हुई, हालांकि आधिकारिक तौर पर एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया।
20 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की सिफारिश पर दोनों सदनों का सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है।
सरकार इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। हालांकि प्रस्तावित विधेयकों की आधिकारिक सूची अभी जारी नहीं की गई है। राजनीतिक दृष्टि से यह मानसून सत्र काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई राष्ट्रीय और नीतिगत मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
