National

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खतरनाक और रेबीज संक्रमित आवारा कुत्तों को यूथेनेशिया की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: खतरनाक और रेबीज संक्रमित आवारा कुत्तों को यूथेनेशिया की अनुमति

नई दिल्ली। Supreme Court of India ने मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से पीड़ित या बेहद खतरनाक आवारा कुत्तों को “यूथेनेशिया” यानी मानवीय तरीके से जान से मारने की अनुमति दे दी है।

यह फैसला न्यायमूर्ति Vikram Nath, Sandeep Mehta और N. V. Anjaria की पीठ ने सुनाया।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है और जहां लगातार काटने या हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहां स्थानीय निकाय और संबंधित अधिकारी जरूरत पड़ने पर ऐसे कुत्तों को यूथेनेशिया देने का फैसला ले सकते हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की जांच और सलाह के बाद ही की जाएगी। साथ ही ‘पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960’ और ‘पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023’ सहित सभी कानूनी प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होगा।

स्वतः संज्ञान लेकर शुरू हुई थी सुनवाई

शीर्ष अदालत ने इस मामले में पिछले वर्ष स्वतः संज्ञान लिया था। दिल्ली समेत कई शहरों में बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों पर आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुनवाई शुरू की गई थी।

“डर के साये में जीना स्वीकार नहीं”

पीठ ने कहा कि सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार में यह भी शामिल है कि लोग कुत्तों के हमलों के भय से मुक्त होकर जीवन जी सकें।

अदालत ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत जमीनी हकीकत से आंखें नहीं मूंद सकती, जहां बच्चे, बुजुर्ग और विदेशी पर्यटक तक आवारा कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं।

राज्यों और स्थानीय निकायों को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं। इसमें बंध्याकरण, टीकाकरण, आश्रय केंद्र और निगरानी तंत्र को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।

About Author

Editor Jamhoora

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *