कोलकाता। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के दौरान कई जगहों से हिंसा और झड़प की घटनाएं सामने आई हैं। दक्षिण मिदनापुर में भाजपा प्रत्याशी Suvendu Sarkar पर हमला किया गया, जबकि मुर्शिदाबाद और सिलीगुड़ी समेत अन्य इलाकों में भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव देखने को मिला।
भाजपा प्रत्याशी पर हमला, वीडियो वायरल
दक्षिण मिदनापुर के कुमारगंज क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु सरकार पर कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने हमला कर दिया। जानकारी के मुताबिक, वह एक बूथ पर कथित गड़बड़ी की सूचना मिलने पर पहुंचे थे, जहां भीड़ ने उन पर लाठी-डंडों और घूंसे से हमला किया।
घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह सुरक्षा कर्मियों के साथ खुद को बचाते हुए नजर आ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में यह हमला हुआ।
चुनाव आयोग ने मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
घटना के बाद Election Commission of India ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुर्शिदाबाद में काफिले पर पथराव
मुर्शिदाबाद के नाओदा क्षेत्र में Humayun Kabir के काफिले पर भी हमला हुआ। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने काफिले को घेरकर पत्थरबाजी की, जिससे कई वाहनों के शीशे टूट गए।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। घटना के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने किसी तरह हुमायूं कबीर को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
सिलीगुड़ी में कार्यकर्ताओं के बीच झड़प
सिलीगुड़ी के एक मतदान केंद्र पर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया। शुरुआत में कहासुनी हुई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई।
मौके पर तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया, जिसके बाद मतदान प्रक्रिया फिर से शुरू कराई गई। इलाके को संवेदनशील मानते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
संवेदनशील मतदान के बीच बढ़ी सियासी तकरार
पहले चरण के मतदान के दौरान सामने आई इन घटनाओं ने राज्य में चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हिंसा और गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं।
प्रशासन और चुनाव आयोग की निगरानी में मतदान जारी है, लेकिन इन घटनाओं ने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
