रायपुर। राजधानी स्थित उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक के परिजनों ने अस्पताल परिसर के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसमें छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।
इलाज के दौरान कई ऑपरेशन का आरोप
मृतक राम चरण वर्मा के बेटे राजकुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि उनके पिता पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार इलाज के दौरान उनके पिता के तीन बार ऑपरेशन किए गए।
राजकुमार वर्मा का कहना है कि पहले ऑपरेशन के बाद लीकेज होने की बात कही गई, इसके बाद दोबारा ऑपरेशन किया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में गले का भी ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद मरीज की मौत हो गई।
आयुष्मान योजना के बावजूद लाखों की वसूली का दावा
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान आयुष्मान योजना के तहत 2 लाख 71 हजार रुपये की राशि ली गई। इसके अलावा मेडिकल स्टोर से दवाइयों के नाम पर 15 लाख रुपये से अधिक का बिल बनाया गया, जिसमें से करीब 10 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
इसके साथ ही जांच, ब्लड और अन्य मेडिकल टेस्ट के नाम पर 3 लाख रुपये अलग से वसूले जाने का दावा किया गया है। परिजनों का यह भी आरोप है कि ऑपरेशन के नाम पर 5 लाख रुपये से अधिक नगद लिए गए और अब 5 लाख रुपये और मांगे जा रहे हैं।
“यह मौत नहीं, लापरवाही का नतीजा”
राजकुमार वर्मा ने कहा कि उनके पिता की मौत सामान्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाज के नाम पर गलत तरीके से वसूली की गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन और सरकार से शिकायत की थी, लेकिन सिर्फ जांच का आश्वासन मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
समझाइश की कोशिश नाकाम, प्रदर्शन जारी
मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच पुलिस की मौजूदगी में बैठक हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने किसी भी तरह की क्षतिपूर्ति देने से इंकार कर दिया है।
परिजनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, प्रदर्शन जारी रहेगा और कार्रवाई होने तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अस्पताल को सील करने और उसकी मान्यता रद्द करने की मांग भी की है।
कर्ज लेकर चुकाया इलाज का खर्च
परिजनों ने बताया कि इलाज के खर्च के लिए उन्हें गोल्ड लोन लेना पड़ा, साथ ही रिश्तेदारों और स्वयं सहायता समूहों से कर्ज लेकर अस्पताल का भुगतान किया गया। उनका आरोप है कि अस्पताल द्वारा जो भी राशि मांगी गई, वह मजबूरी में चुकानी पड़ी।
प्रशासन ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
