World

“कभी-कभी तानाशाह की जरूरत होती है” — दावोस में ट्रंप के बयान से वैश्विक राजनीति में उबाल

“कभी-कभी तानाशाह की जरूरत होती है” — दावोस में ट्रंप के बयान से वैश्विक राजनीति में उबाल

दावोस/वॉशिंगटन।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से ट्रंप ने खुद को “तानाशाह” बताते हुए ऐसा बयान दिया, जिसने दुनिया भर की राजनीति और कूटनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कहा कि, “हां, लोग मुझे तानाशाह कहते हैं और मैं मानता हूं कि कभी-कभी तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों का किया खुलकर बचाव

WEF को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके भाषण और नीतियों को लेकर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, रिव्यू शानदार रहे। मुझे खुद यकीन नहीं हो रहा।”
आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि कॉमन सेंस से प्रेरित होते हैं। उनके मुताबिक, “मेरे 95 प्रतिशत फैसले व्यावहारिक सोच पर आधारित होते हैं, इसमें न तो रूढ़िवाद है और न ही उदारवाद।”

लोकतंत्र बनाम सख्त नेतृत्व की बहस

ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र और सख्त नेतृत्व को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जहां उनके समर्थक इसे निर्णायक नेतृत्व की जरूरत बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा करार दे रहे हैं।

ग्रीनलैंड बयान के बाद बदले सुर

गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों ने भी वैश्विक तनाव बढ़ा दिया था। हालांकि दावोस में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वे बल प्रयोग के पक्ष में नहीं हैं। ट्रंप ने कहा, “लोगों ने समझा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा, लेकिन मुझे इसकी जरूरत नहीं है और न ही मैं ऐसा करना चाहता हूं।”

यूरोप की प्रतिक्रिया के बाद नरमी

यूरोपीय देशों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद ट्रंप के रुख में कुछ नरमी भी देखने को मिली। NATO महासचिव मार्क रुटे के साथ बातचीत के बाद ट्रंप ने ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र को लेकर संतुलित समाधान की बात कही। इसके साथ ही आठ यूरोपीय देशों पर प्रस्तावित 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले को भी टाल दिया गया।

दुनिया की नजरें ट्रंप पर

डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान एक बार फिर साबित करता है कि उनके शब्द न सिर्फ अमेरिका की राजनीति को प्रभावित करते हैं, बल्कि पूरी दुनिया की दिशा तय करने की क्षमता रखते हैं। अब देखना होगा कि “तानाशाही” को लेकर दिया गया यह बयान भविष्य की वैश्विक राजनीति में किस तरह की नई लकीर खींचता है।


About Author

Editor Jamhoora

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *