कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुश्किलों से जूझ रही All India Trinamool Congress अब कथित ‘सिग्नेचर स्कैंडल’ को लेकर घिरती नजर आ रही है। मामला विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक प्रस्ताव पर विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों का है, जिसकी जांच अब Criminal Investigation Department ने शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि विपक्ष के नेता के रूप में Shobhandeb Chattopadhyay के नाम का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया गया था। इस प्रस्ताव पर करीब 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया, लेकिन बाद में कुछ विधायकों ने हस्ताक्षर करने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया।
विधानसभा की शिकायत के बाद CID की एंट्री
हस्ताक्षरों में कथित असमानता सामने आने के बाद विधानसभा प्रशासन ने हेयर स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर CID ने जांच शुरू कर दी है। जांच टीम के साथ हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं, जो दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का मिलान कर रहे हैं।
विधायकों के घर पहुंची जांच टीम
जांच के दौरान CID और कोलकाता पुलिस की संयुक्त टीम कई विधायकों के घर पहुंची। इनमें Nayana Bandyopadhyay, Kunal Ghosh, Baharul Islam और Chandranath Sinha जैसे नाम शामिल हैं। अधिकारियों ने हस्ताक्षरों के नमूने लेकर उनकी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विधायक ने लगाया फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
कैनिंग ईस्ट से विधायक Baharul Islam ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसे किसी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। उनका आरोप है कि दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए हैं। इस दावे के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
TMC ने बताया राजनीतिक दबाव
वहीं, विपक्ष के नेता बनाए गए Shobhandeb Chattopadhyay ने पूरे विवाद को राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि विधायकों को परेशान किया जा रहा है और जांच का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है।
अब CID की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हस्ताक्षरों में गड़बड़ी हुई है या यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है। फिलहाल इस कथित ‘सिग्नेचर स्कैंडल’ ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
