रायपुर। रायपुर विधानसभा में शुक्रवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और घोटालों पर लगाम लगाने के लिए अहम विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थन से पारित इस कानून को युवाओं के हित में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस नए कानून के तहत नकल माफिया, फर्जी अभ्यर्थियों और तकनीकी माध्यमों से धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही नकल में शामिल अभ्यर्थियों को तीन साल तक किसी भी भर्ती परीक्षा से वंचित रखा जाएगा।
सीएम ने कहा— ईमानदार प्रतिभा को मिलेगा हक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चर्चा के दौरान कहा कि युवा राज्य के विकास की धुरी हैं और उनके भविष्य के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुईं, लेकिन अब सख्त कानून से इस पर रोक लगेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि संगठित तरीके से नकल कराने वालों की संपत्ति जब्त करने और कुर्की करने का प्रावधान भी रखा गया है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल करने पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
सभी परीक्षाओं पर लागू होगा कानून
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कानून लोक सेवा आयोग, व्यापमं, निगम-मंडल सहित सभी भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं पर लागू होगा। जांच की पारदर्शिता के लिए यह भी तय किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच उप निरीक्षक स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा।
एजेंसियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
परीक्षा आयोजन से जुड़ी एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि किसी भी तरह की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने किया समर्थन
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को फायदा मिलेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। हालांकि उन्होंने राजनीतिक टिप्पणियों से बचने की भी सलाह दी और कहा कि ध्यान सिर्फ छात्रों के हित पर होना चाहिए।
