दमिश्क/वॉशिंगटन।
सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए व्यापक एयरस्ट्राइक शुरू की है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन हॉकआई’ नाम दिया है, जिसके तहत मध्य सीरिया में आतंकियों के करीब 70 ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद जवाबी हमला
यह कार्रवाई उस हमले के जवाब में की गई है, जिसमें हाल ही में सीरिया में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि कई सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। पेंटागन ने इसे अमेरिका की सुरक्षा पर सीधा हमला बताते हुए सख्त जवाब देने की बात कही थी।
अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल
ऑपरेशन के दौरान अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपनी सैन्य क्षमता का पूरा प्रदर्शन किया। हमलों में
- F-15 Eagle फाइटर जेट,
- A-10 Thunderbolt अटैक एयरक्राफ्ट,
- AH-64 Apache हेलीकॉप्टर,
- और HIMARS रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
इसके साथ ही जॉर्डन के F-16 लड़ाकू विमान भी इस अभियान में शामिल रहे।
पेंटागन की दो टूक चेतावनी
पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों और नागरिकों पर हमले को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी संगठन अमेरिकियों को निशाना बनाएगा, उसे दुनिया के किसी भी कोने में खोजकर खत्म किया जाएगा।
ISIS के नेटवर्क पर सीधा वार
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में आतंकियों के ठिकाने, हथियार भंडारण केंद्र और ट्रेनिंग बेस को पूरी तरह ध्वस्त किया गया है। माना जा रहा है कि इससे मध्य सीरिया में ISIS की ऑपरेशनल क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
सीरिया-अमेरिका संबंधों के बीच कार्रवाई
यह सैन्य अभियान ऐसे समय में हुआ है, जब हाल ही में सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने वॉशिंगटन का दौरा किया था। यह 1946 के बाद पहली बार था, जब किसी सीरियाई राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस का दौरा किया, जिससे दोनों देशों के संबंधों में नए बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।
ट्रंप का सख्त संदेश
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ISIS के गढ़ों को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका को धमकी देने वालों को पहले से कहीं ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा।
