रायपुर। राजधानी में गांधी उद्यान से तेलीबांधा तक बनाए जाने वाले प्रस्तावित फ्लाईओवर का काम अब पूरी तरह ठंडे बस्ते में चला गया है। मंत्रालय में हुई हालिया बैठक में कई जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों ने इस परियोजना का खुले तौर पर विरोध किया, जिसके बाद सरकार ने इसे निरस्त करने का फैसला लिया।
क्यों बंद हुआ प्रोजेक्ट?
फ्लाईओवर को लेकर शुरुआती दिनों से ही सवाल उठ रहे थे। अफसरों और जनप्रतिनिधियों का तर्क था कि—
- गांधी उद्यान–तेलीबांधा रोड पहले से ही पर्याप्त चौड़ी है
- यहां कभी भी नियमित ट्रैफिक जाम की स्थिति नहीं बनती
- ऐसे में फ्लाईओवर की जरूरत ही नजर नहीं आती
कई विधायकों ने यह आपत्ति सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाई। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री भी इस परियोजना से सहमत नहीं थे। तय हुआ कि अनावश्यक खर्च से बचते हुए इस प्रोजेक्ट को रोका जाए।
173 करोड़ की योजना, फाइल साइन होने ही वाली थी
हालांकि, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अपनी ओर से लगभग सभी तकनीकी तैयारियाँ पूरी कर ली थीं—
- ड्राइंग–डिज़ाइन तैयार
- मिट्टी की जांच
- टेंडर प्रक्रिया शुरू
- 15 ठेका कंपनियों की भागीदारी
- 173 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान
बताया जा रहा है कि फाइल पर अंतिम हस्ताक्षर होना ही बाकी था। इसी दौरान मंत्रालय की बैठक में आपत्तियों के चलते प्रोजेक्ट रोक दिया गया।
कैसा था प्रस्तावित फ्लाईओवर?
योजना के मुताबिक—
- लंबाई: 1.5 किमी
- चौड़ाई: 16.61 मीटर
- फोर लेन फ्लाईओवर
- गांधी उद्यान से शंकरनगर चौक होते हुए केनाल रोड क्रॉसिंग
- तेलीबांधा तालाब के पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस चौक पर उतरना
- अटल एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी का फायदा
अगर प्रोजेक्ट बनता, तो ट्रैफिक का दबाव और स्मूथ हो सकता था, लेकिन वास्तविक आवश्यकता न होने के कारण इसे रोक दिया गया है।
टेंडर प्रक्रिया पर ब्रेक लगा
पीडब्ल्यूडी को अब टेंडर की तकनीकी जांच आगे बढ़ानी थी—जैसे कंपनियों के दस्तावेज, टर्नओवर और पूर्व अनुभव की पुष्टि।
लेकिन प्रोजेक्ट के रद्द होने की खबर विभाग में फैलते ही जांच आगे बढ़ाई ही नहीं गई।
