जशपुर। जिले में हत्या के एक सनसनीखेज मामले में उस वक्त बड़ा खुलासा हुआ, जब जिस युवक की मौत मानकर पुलिस ने तीन लोगों को जेल भेज दिया था, वही युवक जिंदा पाया गया। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ पुलिस जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पूरे मामले को रहस्य में डाल दिया है।
दरअसल, 18 अक्टूबर को जशपुर के समीप जंगल क्षेत्र में एक युवक का अधजला शव बरामद हुआ था। शुरुआती जांच में पुलिस ने शव की पहचान सीमित खाड़ा (28 वर्ष) के रूप में की थी। पहचान के आधार पर पुलिस ने पैसों के लेन-देन के विवाद को हत्या की वजह मानते हुए 2 नवंबर को सितोंगा निवासी रामजीत राम, वीरेंद्र राम समेत एक नाबालिग को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मामले में आगे 20 दिसंबर को बड़ा मोड़ तब आया, जब पुलिस डायरी में मृतक के रूप में दर्ज सीमित खाड़ा झारखंड से अपने घर लौट आया। इसके बाद स्पष्ट हो गया कि जिसकी हत्या मानकर कार्रवाई की गई थी, वह जीवित है।
पुलिस के अनुसार, शव मिलने के समय आरोपियों ने पूछताछ में सीमित की हत्या कर शव को जलाने और पहचान मिटाने की बात स्वीकार की थी। इसी आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि अब पूरी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि शव की पहचान नायब तहसीलदार की मौजूदगी में कराई गई थी, फिर भी इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, इसकी गहन जांच की जा रही है।
वहीं, सीमित खाड़ा के परिजनों ने बताया कि वह मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करता था और गांव में नेटवर्क की समस्या के कारण परिवार से संपर्क नहीं हो पाया। इसी वजह से उन्हें लंबे समय तक उसकी सही जानकारी नहीं मिल सकी। परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें यह नहीं पता था कि सीमित झारखंड में है।
फिलहाल पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जंगल से मिला अधजला शव किसका था और पूरे मामले में कहां-कहां लापरवाही हुई। साथ ही, गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी पुनर्विचार किया जा रहा है।
