नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के सभी इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि इन कुत्तों को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा। यह फैसला कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों के बीच आया है।
RWAs ने स्वागत किया, एनिमल एक्टिविस्ट्स ने जताई आपत्ति
जहां रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस (RWAs) ने इस फैसले का स्वागत किया, वहीं पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि नगर निगमों के पास इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों को रखने के लिए न तो पर्याप्त जमीन है और न ही फंड। उनका कहना है कि यह कदम मानव-पशु संघर्ष को और बढ़ा सकता है।
सोशल मीडिया पर बंटे लोग
एक यूज़र ने लिखा, “अगर आपको स्ट्रे डॉग्स से इतना प्यार है, तो कुछ कुत्तों को अपने घर ले जाइए, उनका टीकाकरण और देखभाल कीजिए। सिर्फ बासी रोटियां खिलाना एनिमल एक्टिविज्म नहीं है।”
दूसरे ने कहा, “किसी तीन साल के बच्चे की जान जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए सिर्फ इसलिए कि कोई आवारा कुत्तों के प्रति दया दिखाना चाहता है।”
वहीं, एक यूज़र ने आलोचना करते हुए लिखा, “यह आदेश संवेदनहीन है और एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 समेत कई पशु कल्याण कानूनों का उल्लंघन करता है।”
6-8 हफ्तों में 5,000 कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और गाज़ियाबाद की नगर निकायों को निर्देश दिया है कि 6 से 8 हफ्तों में कम से कम 5,000 कुत्तों के लिए शेल्टर कैपेसिटी तैयार करें। इन शेल्टरों में पर्याप्त स्टाफ, नसबंदी और टीकाकरण की सुविधा, CCTV मॉनिटरिंग और भविष्य में क्षमता बढ़ाने की योजना होनी चाहिए।
साथ ही, डॉग बाइट हेल्पलाइन शुरू करने, सभी इलाकों से चाहे नसबंदी किए गए हों या नहीं, सभी कुत्तों को हटाने और इस अभियान में बाधा डालने वालों पर कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
