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पतंजलि पर घटिया घी बेचने का आरोप, कोर्ट ने लगाया 1.40 लाख का जुर्माना; कंपनी बोली– आदेश त्रुटिपूर्ण

पतंजलि पर घटिया घी बेचने का आरोप, कोर्ट ने लगाया 1.40 लाख का जुर्माना; कंपनी बोली– आदेश त्रुटिपूर्ण

पिथौरागढ़/रायपुर।
योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि एक बार फिर विवादों में है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पतंजलि गाय के घी के सैंपल फेल पाए जाने के बाद स्थानीय अदालत ने निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर कुल 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि कंपनी ने इस आदेश को “त्रुटिपूर्ण और विधि-विरुद्ध” करार देते हुए अपील की तैयारी शुरू कर दी है।


2020 से चल रहा मामला, दोनों लैब में फेल हुए सैंपल

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) पिथौरागढ़ की अदालत ने यह दंड खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लगाया है।
सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त आर.के. शर्मा के मुताबिक—

  • अक्टूबर 2020 में पतंजलि घी के नमूने लिए गए।
  • इन्हें रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया, जहां सैंपल फेल हो गए।
  • इसके बाद व्यापारियों के अनुरोध पर सितंबर 2021 में नमूने सेंट्रल रेफरल लैब भेजे गए।
  • केंद्र की प्रयोगशाला ने भी वर्ष 2022 में घी के नमूनों को मानकों पर खरा नहीं पाया।

इसके आधार पर अदालत ने निर्माता पर 1.25 लाख और वितरक/खुदरा विक्रेता पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया। 19 नवंबर को आए फैसले की कॉपी विभाग को हाल ही में मिली।


पतंजलि का पलटवार — “सैंपलिंग और परीक्षण प्रक्रिया ही दोषपूर्ण”

कोर्ट के आदेश के बाद पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने आधिकारिक प्लैटफॉर्म ‘X’ पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। कंपनी ने फैसले को कई आधारों पर चुनौती दी है:

पतंजलि के मुख्य तर्क

  1. रेफरल लैब NABL मान्यता प्राप्त नहीं थी
    कंपनी का कहना है कि जिस लैब ने सैंपल टेस्ट किए, वह गाय के घी की जांच के लिए आधिकारिक रूप से मान्य ही नहीं है। ऐसे में परिणाम “कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं” हैं।
  2. जिन मानकों पर घी फेल बताया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे
    पतंजलि का दावा है कि जांच जिन पैरामीटरों पर आधारित थी, वे परीक्षण के समय नियम पुस्तिका में प्रभावी नहीं थे।
  3. सैंपल की एक्सपायरी डेट के बाद दोबारा टेस्ट
    दोबारा जांच ‘एक्सपायर्ड सैंपल’ पर की गई, जो कंपनी के अनुसार कानून के खिलाफ है।

कंपनी का कहना है कि इन प्रमुख बिंदुओं पर अदालत ने विचार नहीं किया और जल्दबाज़ी में प्रतिकूल आदेश पारित कर दिया। पतंजलि अब इस फैसले के खिलाफ फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील दायर कर रही है।


“घी हानिकारक नहीं, सिर्फ RM Value में मामूली अंतर” — पतंजलि

स्पष्टीकरण में पतंजलि ने यह भी कहा कि अदालत के आदेश में कहीं भी घी को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं बताया गया है
मामला सिर्फ RM Value के मामूली अंतर से जुड़ा है, जो घी में मौजूद volatile fatty acids का स्तर बताता है।

पतंजलि के अनुसार:

  • RM Value प्राकृतिक रूप से क्षेत्र, जलवायु और पशुओं के आहार के हिसाब से बदलती रहती है।
  • FSSAI भी इस मानक को समय-समय पर संशोधित करता रहता है।
  • ऐसे में इसे “गुणवत्ता में कमी” का आधार नहीं बनाया जा सकता।

कंपनी ने दावा किया कि उसका घी राष्ट्रीय स्तर पर सख्त जांच और गुणवत्ता मानकों के बाद ही बाजार में पहुंचता है।


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Editor Jamhoora

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