मार्गशीर्ष मास में पड़ने वाली अमावस्या को शास्त्रों में अत्यंत पावन तिथि माना गया है। इस दिन किए गए तर्पण, पिंडदान और दीपदान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश तर्पण या पिंडदान न कर सके, तो कुछ सरल दीपक उपायों के माध्यम से भी पितृ कृपा प्राप्त की जा सकती है।
हिंदू कैलेंडर में वर्षभर आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में मार्गशीर्ष अमावस्या को विशेष महत्व दिया गया है। इसे अगहन अमावस्या भी कहा जाता है। यह महीना दान, धर्म और पुण्यार्जन के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अमावस्या कब है?
इस बार अमावस्या तिथि
- 19 नवंबर, बुधवार सुबह 9:43 बजे से शुरू,
- 20 नवंबर, गुरुवार दोपहर 12:16 बजे तक रहेगी।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार उदयातिथि को मान्य माना जाता है, इसलिए मार्गशीर्ष अमावस्या 20 नवंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी।
मार्गशीर्ष अमावस्या पर इन चार स्थानों पर दीपक अवश्य जलाएं
1. घर के मुख्य द्वार पर दीपक
धन और सौभाग्य के लिए घर के प्रवेश द्वार पर घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पास में एक लोटा जल रखें। यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और माता लक्ष्मी के आगमन के लिए शुभ माना जाता है।
2. पितरों के मार्ग के लिए दीपदान
सरसों के तेल का दीपक शाम के समय जलाएं। मान्यता है कि अमावस्या की रात पितर अपने लोक की ओर प्रस्थान करते हैं। दीपक का प्रकाश उनके मार्ग को रोशन करता है, जिससे वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
3. पितरों की तस्वीर के सामने दीपक
जहां भी घर में पितरों की तस्वीरें या स्मृति स्थल हों, वहां एक दीप अवश्य जलाएं। यह श्रद्धा और आत्मिक संबंध का प्रतीक माना जाता है।
4. पीपल वृक्ष के नीचे दीपदान
इस दिन पीपल की पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है। पीपल के नीचे
- देवताओं के लिए तिल के तेल का
- और पितरों के लिए सरसों के तेल का
दीपक जलाने से पितृदोष शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
दीपदान का महत्व
ऐसा कहा जाता है कि दीप केवल अंधकार को दूर नहीं करता, बल्कि व्यक्ति के मन और आत्मा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। श्रद्धापूर्वक किए गए ये उपाय पितरों की संतुष्टि, घर-परिवार की उन्नति और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
