मालेगांव विस्फोट मामले में सभी आरोपी बरी होने के बाद बड़ा खुलासा
मुंबई, 1 अगस्त 2025
मालेगांव ब्लास्ट केस को लेकर महाराष्ट्र एटीएस (आतंकवाद विरोधी दस्ते) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने ऐसा खुलासा किया है जिससे देश की सियासत में भूचाल आ सकता है। वर्ष 2008 में हुए मालेगांव विस्फोट की जांच टीम का हिस्सा रहे पूर्व निरीक्षक मेहबूब मुजावर ने दावा किया है कि उन्हें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए थे।
मुजावर ने आरोप लगाया कि यह निर्देश उन्हें “भगवा आतंकवाद” की कहानी गढ़ने के उद्देश्य से दिए गए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “ना कोई भगवा आतंकवाद था, और ना ही हमारे पास उसका कोई प्रमाण था। सब कुछ एक पूर्वनियोजित साजिश के तहत किया जा रहा था।”

“मेरे खिलाफ दर्ज किया गया झूठा केस”
पूर्व एटीएस अधिकारी ने यह भी कहा कि जब उन्होंने इन निर्देशों का पालन करने से इनकार किया, तो उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया गया और उनका पूरा करियर चौपट कर दिया गया। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया, जिनके नाम – राम कालसांगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और यहां तक कि मोहन भागवत – जांच में सीधे तौर पर नहीं आ रहे थे। एक सामान्य पुलिस अधिकारी के लिए यह आदेश न केवल असंभव था, बल्कि खतरनाक भी था।”
“ऊपरी स्तर से था दबाव”
मुजावर ने सीधे तौर पर तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह आदेश तत्कालीन पुलिस अधिकारी परमबीर सिंह और उनके ऊपर के अधिकारियों से आया था। उन्होंने यह भी बताया कि इस काम के लिए उन्हें महाराष्ट्र से दस पुलिसकर्मी दिए गए थे, साथ ही “सर्विस सीक्रेट फंड” से धन और एक आधिकारिक रिवॉल्वर भी प्रदान किया गया था।
एनआईए कोर्ट का फैसला और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित समेत सात आरोपियों को हाल ही में एनआईए की विशेष अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया।
शुरुआती जांच एटीएस ने की थी, जिसे बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया। फैसले के बाद अब इस मामले से जुड़े अधिकारियों के पुराने बयान और खुलासे फिर से चर्चाओं में आ गए हैं।
