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दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच में बड़ा मोड़, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी 13 दिन की ED हिरासत में

दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच में बड़ा मोड़, अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी 13 दिन की ED हिरासत में

नई दिल्ली। लाल किला कार धमाके की जांच से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार को साकेत कोर्ट ने उन्हें 13 दिनों की ईडी रिमांड पर भेज दिया। यह गिरफ्तारी सीधे धमाका केस की नहीं, बल्कि उससे जुड़े वित्तीय अनियमितताओं और अवैध धन के लेन-देन से संबंधित है।

छापेमारी के दौरान मिली थी गिरफ्तारी

ईडी ने मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े अधिकारियों के 19 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की थी। इसी दौरान मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के आधार पर सिद्दीकी को पकड़ा गया। उनकी गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) की धारा 19 के तहत की गई है।


ईडी के रिमांड नोट में क्या सामने आया?

जांच एजेंसी के अनुसार, अल-फलाह यूनिवर्सिटी लंबे समय से फर्जी मान्यताओं और भ्रामक दावों के आधार पर छात्रों को दाखिला दे रही थी। इसी खेल के जरिए संस्थान ने करीब 415 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की।

आयकर रिटर्न की समीक्षा में भी कई गड़बड़ियां मिलीं।

  • वित्त वर्ष 2014–15 में 30.89 करोड़ और
  • 2015–16 में 29.48 करोड़ रुपये को दान की राशि बताया गया।
    इसके बाद 2016–17 से यूनिवर्सिटी ने अपनी आय को ‘शैक्षणिक कमाई’ के रूप में दिखाना शुरू किया, जो 2018–19 में 24.21 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में 80.01 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

FIR का आधार और गंभीर आरोप

ईडी की कार्रवाई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा 13 नवंबर को दर्ज की गई दो FIR पर आधारित है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने NAAC मान्यता और UGC की 12(B) मान्यता होने का झूठा दावा किया। इसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर आर्थिक लाभ कमाना था।

यूजीसी ने साफ किया कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी केवल UGC एक्ट की धारा 2(f) में शामिल है और उसने 12(B) मान्यता के लिए आवेदन भी नहीं किया।

इन शिकायतों पर दिल्ली पुलिस ने BNS की कई धाराओं—318(4), 336(2), 336(3), 336(4), 338 और 340(2)—के तहत मामला दर्ज किया है।


ट्रस्ट और विस्तार पर भी सवाल

अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना 1995 में हुई थी। जावेद सिद्दीकी शुरुआत से ट्रस्टी रहे हैं और पूरे समूह के ‘वास्तविक नियंत्रक’ माने जाते हैं। ट्रस्ट के अधीन ही यूनिवर्सिटी और उसके सभी कॉलेज चलते हैं। एजेंसी को इस बात पर भी संदेह है कि संस्थान का तेजी से बढ़ा विस्तार घोषित वित्तीय हैसियत से मेल नहीं खाता।


छापेमारी में क्या मिला?

ईडी और अन्य एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में:

  • 48 लाख रुपये से अधिक नकदी,
  • कई डिजिटल डिवाइस,
  • अहम दस्तावेज,
  • और शेल कंपनियों से जुड़े प्रमाण मिले।

ईडी का कहना है कि ट्रस्ट के फंड को व्यवस्थित तरीके से सिद्दीकी परिवार की कंपनियों में डायवर्ट किया गया। निर्माण से लेकर कैटरिंग तक के ठेके सिद्दीकी की पत्नी और बच्चों की कंपनियों को दिए जाते रहे।

जांच एजेंसी का दावा है कि सिद्दीकी ने अवैध कमाई की लेयरिंग की और जटिल लेन-देन के जरिए धन को छुपाने की कोशिश की।


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Editor Jamhoora

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