इस्लामाबाद। पाकिस्तान की संसद में बुधवार को भारी हंगामे के बीच 27वां संवैधानिक संशोधन पारित किया गया, जिससे सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) को पहले से कहीं अधिक शक्तियां मिल गई हैं। अब वे रक्षा बलों के सर्वोच्च प्रमुख होंगे और थलसेना, नौसेना व वायुसेना—तीनों की कमान उनके अधीन रहेगी।
सेना प्रमुख बने ‘सुपर बॉस’
संशोधन के बाद असीम मुनीर को औपचारिक रूप से रक्षा बलों के प्रमुख (Chief of Defence Forces) के नए पद पर पदोन्नत किया जाएगा।
इस पद के साथ उन्हें आजीवन कानूनी संरक्षण भी मिलेगा, यानी कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।
संसद में भारी हंगामा
नेशनल असेंबली में यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत से पारित किया गया। लेकिन विपक्षी दलों ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताते हुए जमकर विरोध किया। विपक्षी नेताओं ने सदन में नारेबाजी करते हुए कहा कि इस संशोधन से पाकिस्तान पूरी तरह सेना के नियंत्रण में चला गया है।
सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां भी सीमित
इस संशोधन के तहत न सिर्फ सेना प्रमुख की शक्तियों में इज़ाफा किया गया है, बल्कि पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के अधिकार क्षेत्र को भी सीमित कर दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला है।
विपक्ष का तीखा हमला
पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने इसे “लोकतंत्र का अंतिम संस्कार” करार देते हुए कहा कि,
“पाकिस्तान में अब जनता नहीं, वर्दी तय करेगी कि देश कैसे चलेगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संशोधन के बाद पाकिस्तान में सेना की भूमिका सिर्फ सुरक्षा तक सीमित न रहकर, राजनीति और नीतिगत फैसलों तक फैल जाएगी — यानी जनरल असीम मुनीर अब पाकिस्तान के वास्तविक शासक बन गए हैं।
