रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किया। बजट पेश होते ही सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस ने जहां बजट को “दिशाहीन” बताया, वहीं भाजपा ने इसे विकास और रोजगार सृजन की दिशा में जरूरी कदम करार दिया।
कांग्रेस का आरोप: कर्ज बढ़ा, विजन गायब
अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ लगातार कर्ज के बोझ में दबता जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने से महज तीन महीने पहले इतना बड़ा अनुपूरक बजट क्यों लाया गया।
उन्होंने कहा,
“इस बजट में न रोजगार का स्पष्ट रोडमैप है, न किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए ठोस योजनाएं। सरकार इवेंट मैनेजमेंट पर ज्यादा और विकास कार्यों पर कम ध्यान दे रही है।”
कांग्रेस विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि—
- नए पदों पर भर्ती का कोई प्रावधान नहीं
- अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण पर चुप्पी
- 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन अब तक नहीं
- किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल रहा
महिला योजनाओं पर भी उठे सवाल
राघवेंद्र सिंह ने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को 1000 रुपये दिए जा रहे हैं, लेकिन बिजली बिल और महंगाई के कारण इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट विजन और प्राथमिकताएं तय करने की मांग की।
भाजपा का जवाब: रोजगार और उद्योग पर फोकस जरूरी
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा अनुपूरक बजट है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने राजस्व व्यय बढ़ाने की शुरुआत की थी और धान खरीदी को राजनीतिक मुद्दा बनाया।
चंद्राकर ने कहा,
“राज्य में रोजगार सृजन के लिए नए उद्योगों को बढ़ावा देना जरूरी है। ऐसे उद्योग प्राथमिकता में हों, जिनसे छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों को सीधा लाभ मिले।”
उन्होंने कृषि क्षेत्र को राज्य की रीढ़ बताते हुए कृषि अनुसंधान केंद्रों को अधिक संसाधन देने की जरूरत पर जोर दिया।
महिला स्व-सहायता समूह और आदिवासी विकास पर जोर
भाजपा विधायक ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों की अवधारणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की देन है, जिससे कुटीर और पारंपरिक उद्योगों को मजबूती मिली। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार एससी-एसटी वर्ग, जिसकी आबादी लगभग 42 प्रतिशत है, के हित में बेहतर काम कर रही है।
