छठ महापर्व का तीसरा दिन आज अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। शाम को व्रती महिलाएं और श्रद्धालु अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित यह पर्व प्रकृति, मातृत्व और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि छठी मैया, देवी कात्यायनी (मां पार्वती का स्वरूप) और सूर्यदेव की बहन हैं, इसलिए इसे सूर्य षष्ठी व्रत भी कहा जाता है।
संध्या अर्घ्य का शुभ मुहूर्त
- समय: शाम 5:10 बजे से 5:58 बजे तक
इस अवधि में व्रती नदी, तालाब या घाटों पर पहुंचकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करेंगे और परिवार की समृद्धि, स्वास्थ्य तथा कल्याण की कामना करेंगे।
अगला चरण – उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
- छठ पर्व का चौथा और अंतिम दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी, यानी 28 अक्टूबर 2025 को होगा।
- इस दिन प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त किया जाएगा।
- यह व्रत संतान सुख, उसके स्वास्थ्य और उन्नति की कामना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
- ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है और यह पाचन तंत्र व त्वचा संबंधी रोगों में भी लाभकारी माना जाता है।
पूजा सामग्री व विधि
आवश्यक सामग्री:
- दो बांस की टोकरी (पथिया और सूप), साथ में डगरी, पोनिया, कलश, सरवा आदि।
- टोकरी में सूर्य देव के अर्पण हेतु प्रसाद रखा जाता है – ठेकुआ, मखाना, सुपारी, भुसवा, अंकुरित अनाज, गन्ना आदि।
- पाँच प्रकार के फल – केला, नारियल, शरीफा, नाशपाती और डाभ (बड़ा नींबू)
- पंचमेवा मिठाई और टोकरी पर सिंदूर व पिठार लगाना शुभ माना जाता है।
अर्घ्य विधि:
- संध्या अर्घ्य बांस या पीतल के सूप/टोकरी से दिया जाता है।
- जल चढ़ाते समय “ॐ आदित्याय नमः” या “ॐ भास्कराय नमः” मंत्र का जाप करें।
- उसके बाद प्रार्थना करें – “जय छठी मैया, जय सूर्य भगवान, संतान-सुख, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करें।”
