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अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर बढ़ाया दावा, संसद में पेश हुआ कब्जे का बिल, 51वां राज्य बनने की बहस तेज

अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर बढ़ाया दावा, संसद में पेश हुआ कब्जे का बिल, 51वां राज्य बनने की बहस तेज

वॉशिंगटन/कोपेनहेगन।
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव और गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोच को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी संसद में ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने से जुड़ा एक विवादित बिल पेश किया गया है। रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने इसे ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नाम दिया है। यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपना 51वां राज्य बनाने का रास्ता मिल सकता है।

हालांकि फिलहाल यह बिल सिर्फ संसद में पेश हुआ है। इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—दोनों से मंजूरी मिलनी जरूरी होगी, जिसे विशेषज्ञ बेहद कठिन मान रहे हैं।

🌐 यूरोप में बढ़ी बेचैनी, डेनमार्क का कड़ा विरोध

ग्रीनलैंड पर बिल पेश होते ही डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ गई है। डेनमार्क सरकार ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है और यहां तक चेतावनी दी है कि ऐसे कदमों से नाटो की एकता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि फ्रांस और ब्रिटेन जैसे बड़े यूरोपीय देश इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आए हैं।

ग्रीनलैंड पिछले 300 वर्षों से डेनमार्क के अधीन है और वहां की स्वायत्त सरकार भी किसी बाहरी दखल के सख्त खिलाफ है।

🧭 रूस-चीन का हवाला देकर बिल को ठहराया जरूरी

बिल पेश करने वाले सांसद रैंडी फाइन ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह कदम रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यदि अमेरिका ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो आर्कटिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि यह प्रस्ताव वैश्विक संधियों और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ जाता है, इसलिए इसके पास होने की संभावना बेहद कम है।

🇺🇸 ट्रंप का खुला समर्थन, बोले– अमेरिका की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर अमेरिका पीछे हटा, तो रूस और चीन जैसे देश वहां अपनी मौजूदगी बढ़ा सकते हैं।

ट्रंप इससे पहले भी यह बयान दे चुके हैं कि ग्रीनलैंड को हासिल करना जमीन खरीदने का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा का सवाल है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि अगर कूटनीतिक रास्ते कामयाब नहीं हुए, तो अमेरिका अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।

⚠️ सैन्य विकल्पों की चर्चा से विवाद

कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य रणनीति तैयार करने के निर्देश भी दिए थे, हालांकि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इसे अव्यावहारिक और कानूनी रूप से गलत बताया है।

🏔️ ग्रीनलैंड के PM का सख्त संदेश

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका देश न तो बिकाऊ है और न ही किसी दबाव में आएगा। उन्होंने अमेरिकी बयानों को ग्रीनलैंड के लोगों के सम्मान के खिलाफ बताया और कहा कि ऐसी तस्वीरें या बयान जमीनी सच्चाई नहीं बदल सकते।


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Editor Jamhoora

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