जगदलपुर।
बस्तर में सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती दबाव रणनीति और पुनर्वासन नीतियों के असर से नक्सल संगठन की पकड़ और कमजोर होती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में बुधवार को क्षेत्र को एक और बड़ी सफलता मिली, जब ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत 10 सक्रिय माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर दिया। surrender करने वालों में सबसे बड़ा नाम है— DKSZC का वरिष्ठ और कुख्यात सदस्य “चैतू उर्फ श्याम दादा”, जिसे झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है।
कौन–कौन आया मुख्यधारा में?
आत्मसमर्पित माओवादियों में कई बड़े इनामी नाम शामिल हैं—
- चैतू उर्फ श्याम दादा (DKSZC सदस्य) – 25 लाख इनाम
- सरोज (DVCM) – 8 लाख इनाम
- ACM भूपेश उर्फ सहायक राम, प्रकाश, कमलेश उर्फ झितरु
- जननी उर्फ रयमती कश्यप, संतोष उर्फ सन्नू, नवीन
- PM सदस्य – रमशीला और जयती कश्यप
इन सभी पर कुल 65 लाख रुपये तक के इनाम घोषित थे। सभी ने स्वेच्छा से संगठन छोड़कर संविधान पर आस्था जताने की बात कही।
समर्पण कार्यक्रम में ‘रेड कार्पेट वेलकम’
बस्तर के शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर लालबाग में आत्मसमर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें IGP बस्तर, SP, पुलिस व केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि और परिजन मौजूद थे।
मुख्यधारा में लौटने वाले माओवादियों का स्वागत लाल कालीन बिछाकर, संविधान की प्रति और गुलदस्ता देकर किया गया।
कौन है चैतू?— झीरम कांड का मुख्य साजिशकर्ता
चैतू का असली नाम गिरी रेड्डी पवन दा रेड्डी है। लगभग 60 वर्षीय यह माओवादी मूलतः तुलसापुर, मंडल रघुनंदापल्ली, जिला वारंगल का रहने वाला है।
- DKSZC का वरिष्ठ सदस्य
- दरभा डिवीजन का प्रभारी
- झीरम घाटी हमले की रणनीति व प्लानिंग में प्रमुख भूमिका
- लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की सूची में सबसे वांटेड
- उसके पास एक AK-47 भी थी, जिसे समर्पण के समय सौंप दिया गया
चैतू आधुनिक टेक्नोलॉजी का माहिर उपयोगकर्ता था और उसके पास टैबलेट, लैपटॉप, टचस्क्रीन मोबाइल, रेडियो, वॉकी-टॉकी, सोलर पैनल व बैटरी जैसे संसाधन उपलब्ध रहते थे।
