आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में लड्डू घी विवाद के बाद अब सिल्क दुपट्टा घोटाला सामने आया है। मंदिर प्रशासन ने एक ऐसा घोटाला पकड़ा है, जिसमें पिछले 10 वर्षों में करीब 55 करोड़ रुपये के नकली सिल्क दुपट्टे मंदिर को सप्लाई किए गए। ये दुपट्टे 100% मुलबेरी सिल्क के नाम पर खरीदे गए थे, लेकिन जांच में पता चला कि वे पूरी तरह पॉलिएस्टर से बने थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी नकली दुपट्टे को उच्च दानदाताओं और विशिष्ट अतिथियों को भेंट किया गया था, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट किया गया सिल्क दुपट्टा भी शामिल है।
क्या मिला जांच में?
TTD के चेयरमैन बी.आर. नायडू ने जानकारी दी कि दुपट्टों के सैंपल दो वैज्ञानिक लैबों में भेजे गए थे—
एक लैब केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) के तहत काम करती है।
दोनों रिपोर्टों में पुष्टि हुई कि—
✔ दुपट्टे पूरी तरह पॉलिएस्टर फैब्रिक के थे
✔ ‘सिल्क होलोग्राम’ नहीं था—जो असली रेशमी दुपट्टों पर अनिवार्य है
✔ दुपट्टे रेशम के मानक (20/22 डेनियर) पर खरे नहीं उतरे
जांच में यह भी सामने आया कि एक ही कंपनी और उससे जुड़ी इकाइयां पिछले 10 वर्षों से लगातार TTD को दुपट्टों की आपूर्ति कर रही थीं।
55 करोड़ का घोटाला कैसे हुआ?
- बाजार में 100% पॉलिएस्टर दुपट्टे की कीमत— ₹300–₹400
- TTD को दिए गए दाम— ₹1200–₹1300 प्रति दुपट्टा
- सालों तक हजारों दुपट्टों की सप्लाई
- कुल अनुमानित घोटाला— ₹55 करोड़ से अधिक
कहां इस्तेमाल होते हैं ये दुपट्टे?
TTD बड़े दानदाताओं, विशेष अतिथियों और वेदाशीर्वाचनम् जैसे पूजा-अनुष्ठानों में यही दुपट्टे उपयोग करता है।
नायडू का कहना है कि—
“जिस दुपट्टे को भक्त पवित्र प्रसाद मानते थे, उसमें भी सस्ता पॉलिएस्टर इस्तेमाल किया गया। यह भक्तों की आस्था से गंभीर धोखा है।”
TTD ने फौरन कंपनी के सभी टेंडर रद्द कर दिए और मामला आंध्र प्रदेश एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दिया है।
मंदिर में पहले भी लग चुके हैं आरोप
1. नकली घी मामला (2024)
TTD लड्डुओं में उपयोग होने वाले घी में—
- मछली का तेल
- बीफ टैलो
- लार्ड
जैसी मिलावट पाए जाने का आरोप लगा था।
सप्लाई चेन की जांच SIT और CBI की निगरानी में जारी है।
2. परकामानी घोटाला (2023)
हुंडी से दान की रकम चोरी करने में एक क्लर्क गिरफ्तार हुआ था।
क्या है दुपट्टे का असली मानक?
मंदिर के नियमों के अनुसार दुपट्टे—
- 100% शहतूत के रेशम से बने होने चाहिए
- ताना-बाना— 20/22 डेनियर
- न्यूनतम मोटाई— 31.5 डेनियर
- “ॐ नमो वेंकटेशाय”— संस्कृत और तेलुगु दोनों में
- शंख, चक्र और नमम् के प्रतीक अनिवार्य
जांच में पाया गया कि इनमें से एक भी मानक पूरा नहीं किया गया।
TTD ने जांच बढ़ाई, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
TTD बोर्ड ने कहा कि मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा और पूरे टेंडर प्रोसेस की दोबारा ऑडिटिंग की जाएगी।
