नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026 में आम करदाताओं को बड़ी राहत या झटका—दोनों में से कोई भी नहीं मिला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करते हुए इनकम टैक्स स्लैब में किसी भी तरह के बदलाव की घोषणा नहीं की। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नया और पुराना—दोनों टैक्स सिस्टम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
हालांकि टैक्स स्लैब जस के तस रखे गए हैं, लेकिन बजट में डायरेक्ट टैक्स से जुड़े कुछ अहम प्रशासनिक बदलाव जरूर किए गए हैं, जो करदाताओं के लिए राहत देने वाले माने जा रहे हैं।
रिवाइज्ड ITR फाइल करने की समय-सीमा बढ़ी
बजट 2026 में सरकार ने रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया है। इससे उन करदाताओं को राहत मिलेगी, जिन्हें रिटर्न में सुधार के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत होती है।
इसके अलावा सरकार ने कुछ मामलों में TDS और TCS की दरों में कटौती की घोषणा भी की है, जिससे नकदी प्रवाह बेहतर होने की उम्मीद है।
FY 2026-27 के लिए नया टैक्स सिस्टम
| इनकम स्लैब (₹) | टैक्स दर |
|---|---|
| 0 – 4,00,000 | शून्य |
| 4,00,001 – 8,00,000 | 5% |
| 8,00,001 – 12,00,000 | 10% |
| 12,00,001 – 16,00,000 | 15% |
| 16,00,001 – 20,00,000 | 20% |
| 20,00,001 – 24,00,000 | 25% |
| 24,00,000 से अधिक | 30% |
👉 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
👉 12 लाख रुपये तक की इनकम पर सेक्शन 87A के तहत पूरी टैक्स छूट मिलेगी।
FY 2026-27 के लिए पुराना टैक्स सिस्टम
पुराने टैक्स सिस्टम में निवेश और खर्च पर छूट की सुविधा बनी रहेगी। इसमें सेक्शन 80C, 80D, होम लोन ब्याज जैसे डिडक्शन का लाभ मिलता है, यही कारण है कि कई करदाता अब भी इस सिस्टम को पसंद करते हैं।
| इनकम स्लैब (₹) | टैक्स दर |
|---|---|
| 2,50,000 तक | शून्य |
| 2,50,001 – 5,00,000 | 5% |
| 5,00,001 – 10,00,000 | 20% |
| 10,00,000 से अधिक | 30% |
पुराने टैक्स सिस्टम पर कोई फैसला नहीं
बजट से पहले यह अटकलें थीं कि सरकार पुराने टैक्स सिस्टम को धीरे-धीरे खत्म कर सकती है। हालांकि बजट 2026 में इसको लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकार का संकेत है कि यदि भविष्य में कोई बदलाव होगा, तो उसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
करदाताओं के लिए क्या है संकेत?
इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव न होने से साफ है कि सरकार फिलहाल टैक्स स्थिरता बनाए रखना चाहती है। नए टैक्स सिस्टम को सरल विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि पुराने सिस्टम में निवेश आधारित छूट की सुविधा बनी हुई है। ऐसे में करदाताओं को अपनी आय और निवेश के आधार पर सही विकल्प चुनने की जरूरत होगी।
