कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बड़े तेवड़ा गांव में हालिया हिंसा के बाद घटनाक्रम ने नया रुख ले लिया है। गांव के चर्च लीडर महेंद्र बघेल ने ईसाई धर्म छोड़कर सार्वजनिक रूप से सनातन धर्म में वापसी की। शीतला मंदिर परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने रामायण को अंगीकार करते हुए ‘घर वापसी’ की घोषणा की।
“धर्मांतरण के दबाव में हुआ था फैसला” – महेंद्र बघेल
घर वापसी के दौरान महेंद्र बघेल ने कहा कि बड़े तेवड़ा और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों का धर्मांतरण कराया गया है। उन्होंने दावा किया कि करीब 200 से अधिक लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित किए जा चुके हैं। महेंद्र बघेल ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अन्य लोग भी अपने मूल धर्म में लौट सकते हैं।
हिंसा के पीछे साजिश का आरोप, कई नाम गिनाए
महेंद्र बघेल ने आरोप लगाया कि हाल ही में आमाबेड़ा–बड़े तेवड़ा क्षेत्र में हुई हिंसा सुनियोजित थी। उन्होंने सरपंच समेत कुछ स्थानीय लोगों पर जानबूझकर माहौल बिगाड़ने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि गांव में धार्मिक तनाव फैलाकर समाज को आपस में लड़ाने की कोशिश की गई।
लाठीचार्ज तक पहुंचा था विवाद
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ईसाई समुदाय और आदिवासी समाज आमने-सामने आ गए थे, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई थी। हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। इस दौरान एडिशनल एसपी सहित कई लोग घायल हुए थे, जिससे मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।
24 दिसंबर को छत्तीसगढ़ बंद की तैयारी
धर्मांतरण और आमाबेड़ा हिंसा के विरोध में सर्व समाज छत्तीसगढ़ ने 24 दिसंबर को प्रदेशव्यापी बंद का आह्वान किया है। इसी क्रम में शीतला मंदिर परिसर में सर्व समाज की बैठक आयोजित कर बंद को शांतिपूर्ण और व्यापक बनाने की रणनीति तैयार की गई। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह बंद जनजातीय आस्था और सामाजिक सौहार्द की रक्षा के लिए है।
सर्व समाज का दावा: ‘यह अकेली घटना नहीं’
सर्व समाज छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट किया कि आमाबेड़ा की घटना कोई अपवाद नहीं है। राज्य के कई जनजातीय और ग्रामीण इलाकों में पहले भी धर्मांतरण को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। समाज का आरोप है कि एक तय पैटर्न के तहत धार्मिक और सामाजिक तनाव पैदा किया जा रहा है, जिसका खामियाजा स्थानीय समुदायों को भुगतना पड़ रहा है।
