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पश्चिम बंगाल में SIR विवाद गहराया: ममता बनर्जी ने फॉर्म भरने से किया इनकार, बोलीं— “नागरिकता साबित करने से बेहतर है जमीन पर नाक रगड़ना”

पश्चिम बंगाल में SIR विवाद गहराया: ममता बनर्जी ने फॉर्म भरने से किया इनकार, बोलीं— “नागरिकता साबित करने से बेहतर है जमीन पर नाक रगड़ना”

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद और गहरा गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ किया है कि उन्होंने SIR फॉर्म नहीं भरा है और ऐसा करना उन्हें नागरिक के रूप में अपमानित करने जैसा लगता है।

11 दिसंबर को SIR फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि थी। अब चुनाव आयोग अगले सात दिनों में संशोधित मतदाता सूची जारी करेगा। इसी बीच ममता बनर्जी के बयान ने राजनीतिक माहौल को एक बार फिर गर्म कर दिया है।

“मैं तीन बार केंद्रीय मंत्री, सात बार सांसद… फिर भी नागरिकता साबित करूं?” — ममता

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा—

“मैंने अभी तक फॉर्म नहीं भरा। क्यों भरूं?
मैं तीन बार केंद्रीय मंत्री, सात बार सांसद और तीन बार मुख्यमंत्री रही हूं।
अब मुझे ही साबित करना पड़े कि मैं नागरिक हूं या नहीं?
इससे तो जमीन पर नाक रगड़ लेना बेहतर है।”

उन्होंने कहा कि नागरिकता साबित करने की यह प्रक्रिया आम लोगों के साथ भी अन्याय है।

भाजपा पर गंभीर आरोप— “1.5 करोड़ नाम हटाने की कोशिश”

इससे पहले नादिया के कृष्णनगर में ममता बनर्जी ने भाजपा और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची से भारी संख्या में नाम हटाने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया—

“अमित शाह खुद इस अभियान को गाइड कर रहे हैं।
अगर एक भी योग्य मतदाता को सूची से बाहर किया गया,
तो मैं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाऊंगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों को दादा-दादी के दस्तावेज देने पर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है और सुनवाई के बाद उनके नाम हटाए जाने की आशंका है।

किन्हें SIR फॉर्म भरने की जरूरत नहीं?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदाधिकारी ‘मार्क्ड इलेक्टर’ होते हैं।
इस श्रेणी में आने वालों को SIR फॉर्म भरने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।

अर्थात, ममता बनर्जी को फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं थी, फिर भी उन्होंने इसे “अपमानजनक प्रक्रिया” बताते हुए सार्वजनिक रूप से इसका विरोध किया है।


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Editor Jamhoora

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