Chhattisgarh

बुलडोजर कार्रवाई के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण, रामचंद्रपुर-रामानुजगंज मार्ग जाम; तहसीलदार को घेरकर किया विरोध

बुलडोजर कार्रवाई के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण, रामचंद्रपुर-रामानुजगंज मार्ग जाम; तहसीलदार को घेरकर किया विरोध

बलरामपुर। जिले के रामचंद्रपुर क्षेत्र में अवैध निर्माण और कब्जों के खिलाफ की गई प्रशासनिक बुलडोजर कार्रवाई ने मंगलवार को बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। कार्रवाई के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मुख्य सड़क पर चक्का जाम कर दिया और तहसीलदार को मौके पर ही घेर लिया। हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक, प्रशासन ने एक प्रस्तावित बालिका छात्रावास के लिए चिन्हित भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। इस दौरान 9 चिन्हित मकानों में से केवल 3 को ही हटाया गया, जिससे शेष परिवारों और स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए और रामचंद्रपुर–सनवाल–रामानुजगंज मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया।

🔴 मुख्य मार्ग ठप, घंटों फंसे वाहन

चक्का जाम के चलते इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। स्कूल वाहन, एंबुलेंस और दैनिक यात्री घंटों जाम में फंसे रहे। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश शुरू की।

🏠 पीड़ितों का आरोप—50 साल से रह रहे, कोई पुनर्वास नहीं

कार्रवाई से प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे पिछले 40–50 वर्षों से उसी स्थान पर निवास कर रहे हैं। अचानक बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए घर तोड़ दिए गए। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि ठंड के मौसम में उन्हें बेघर कर दिया गया और न तो पुनर्वास की कोई योजना बताई गई, न ही लिखित सूचना दी गई।

📢 तहसीलदार को घेर कर की गई सीधी बातचीत

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने तहसीलदार को घेर कर जवाब मांगा और स्पष्ट कहा कि जब तक पुनर्वास और मुआवजे पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक सड़क से नहीं हटेंगे। काफी देर तक प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत चलती रही।

⚠️ प्रशासन की सफाई

प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि कार्रवाई न्यायालय और शासन के निर्देशों के तहत की गई है। हालांकि यह भी आश्वासन दिया गया कि प्रभावित परिवारों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।

सवालों के घेरे में कार्रवाई

स्थानीय लोगों का सवाल है कि—

  • जब 9 मकान चिन्हित थे तो कार्रवाई सिर्फ 3 पर क्यों?
  • बिना पूर्ण पुनर्वास नीति लागू किए बुलडोजर चलाना कितना उचित?
  • क्या नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में ऐसी कार्रवाई से हालात और न बिगड़ेंगे?

बहरहाल, प्रशासन की यह कार्रवाई अब कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनती नजर आ रही है। हालात पूरी तरह तब ही सामान्य होंगे जब ग्रामीणों की सुरक्षा, आवास और पुनर्वास को लेकर ठोस फैसला सामने आएगा।


About Author

Editor Jamhoora

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *