राजनांदगांव।
छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को एक निर्णायक सफलता मिली है। खैरागढ़ जिले में एक करोड़ से अधिक के इनामी CPI (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य रामधेर मज्जी ने अपने 12 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इस बड़ी घटना के बाद राजनांदगांव स्थित न्यू सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे नक्सलवाद के लिए बड़ा झटका बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही अंतिम समाधान है। उन्होंने रामधेर के सरेंडर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह संकेत है कि नक्सली संगठन के भीतर अब भरोसा और मनोबल टूट चुका है।
दो साल में बदली तस्वीर: 500 से ज्यादा माओवादी ढेर, 4000 से अधिक सरेंडर या गिरफ्तार
सीएम साय ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने 500 से अधिक माओवादियों को मार गिराया है, जबकि 4000 से ज्यादा नक्सली या तो आत्मसमर्पण कर चुके हैं या गिरफ्तार हुए हैं। उनके अनुसार, ये आंकड़े बताते हैं कि नक्सल नेटवर्क लगातार कमजोर हो रहा है।
उन्होंने कहा कि जवान पूरी रणनीति और सटीक इंटेलिजेंस के साथ काम कर रहे हैं, जिसका असर सीधे जमीनी हालात में दिख रहा है।
‘डबल इंजन’ का असर, 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य को केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार का स्पष्ट लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 13 दिसंबर को सरकार के दो साल पूरे हो रहे हैं और इस दौरान नक्सल मोर्चे पर जो उपलब्धियां मिली हैं, वह सुरक्षा बलों और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक प्रयास का परिणाम हैं।
पुनर्वास नीति बनी बड़ा हथियार
सरकार का मानना है कि केवल हथियार के दम पर नहीं, बल्कि बेहतर पुनर्वास नीति से ही नक्सलवाद को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
सीएम साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए शिक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से जुड़ी योजनाएं चल रही हैं। नई औद्योगिक नीति में भी उनके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि बस्तर के 400 से ज्यादा गांव आज दोबारा आबाद हो चुके हैं, जो इस नीति की सफलता को दर्शाता है।
सुरक्षा तंत्र ने बांध रखी कमर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी अरुण देव गौतम, एडीजी नक्सल ऑप्स विवेकानंद सिन्हा, रेंज आईजी अभिषेक शांडिल्य समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि आने वाले समय में और बड़े सरेंडर देखने को मिल सकते हैं।
