नई दिल्ली। देशभर में इंडिगो की उड़ानों के लगातार रद्द होने से उपजे संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि इस मामले में केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हैं, इसलिए अभी न्यायिक दखल की आवश्यकता नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोर्ट यात्रियों की परेशानी को समझता है, लेकिन जब तक सरकार हालात को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रही है, तब तक अदालत को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियां जस की तस बनी रहतीं, तो कोर्ट अलग रुख अपना सकता था।
याचिकाकर्ता ने उठाए मानवीय संकट के मुद्दे
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने कोर्ट को अवगत कराया कि बीते एक सप्ताह में लगभग 2500 उड़ानें प्रभावित हुई हैं और करीब 95 हवाई अड्डों पर इसका असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में यात्री वैकल्पिक व्यवस्था और मुआवजे के अभाव में फंसे हुए हैं, जिससे हालात मानवीय संकट जैसे बन गए हैं। याचिका में कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
CJI से व्यक्तिगत तौर पर की गई थी तत्काल सुनवाई की मांग
इस मामले को लेकर 6 दिसंबर को याचिकाकर्ता के वकील ने मुख्य न्यायाधीश से उनके आवास पर मुलाकात कर त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया था। उस समय सीजेआई कार्यालय की ओर से आश्वासन दिया गया था कि याचिका पर विचार किया जाएगा। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि मौजूदा हालात में सरकार को ही स्थिति संभालने दिया जाए।
सातवें दिन भी नहीं थमा संकट
दूसरी ओर, इंडिगो के परिचालन संकट से यात्रियों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही है। सोमवार को संकट के सातवें दिन भी सुबह 10 बजे तक देशभर में 350 से ज्यादा उड़ानें रद्द की जा चुकी थीं। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और श्रीनगर जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों को लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन का सामना करना पड़ा।
रविवार को इंडिगो ने 650 से अधिक उड़ानें रद्द की थीं, हालांकि यह संख्या इससे पहले के दिनों में हुई लगभग 1000 कैंसिलेशन से कुछ कम रही। दिल्ली एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति जरूर जांच लें। एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना है कि सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।
