मुंबई। भारतीय विज्ञापन जगत के सबसे प्रभावशाली क्रिएटिव दिमागों में शामिल और ‘एड गुरु’ के नाम से मशहूर पीयूष पांडे का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे मुंबई में रहते थे और रविवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु की पुष्टि उनके करीबी मित्र और बिजनेस कंसल्टेंट सुहैल सेठ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर पोस्ट साझा कर की।
क्रिएटिव दुनिया को अलविदा
पीयूष पांडे ने भारतीय विज्ञापन जगत को एक नया दृष्टिकोण दिया। वे 1982 में ओगिल्वी (Ogilvy India) से जुड़े और चार दशकों तक इस संस्था के साथ जुड़े रहे। अंग्रेज़ी वर्चस्व वाले विज्ञापन क्षेत्र में उन्होंने हिंदी और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को केंद्र में रखकर कई ऐतिहासिक कैंपेन तैयार किए।
उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी के लिए चर्चित राजनीतिक नारा ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ लिखा था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त प्रभाव डाला।
इसके अलावा, ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’, ‘ठंडा मतलब कोका-कोला’, ‘चलो निकल पड़े हैं’, जैसे विज्ञापन आज भी लोगों की स्मृतियों में बसे हैं।
अंतिम संस्कार आज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे कुछ समय से गंभीर इंफेक्शन से पीड़ित थे, हालांकि आधिकारिक तौर पर मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। उनका अंतिम संस्कार आज सुबह 11 बजे मुंबई में किया जाएगा।
उद्योग जगत में शोक की लहर
सुहैल सेठ ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा — “भारत ने सिर्फ एक महान विज्ञापनकार नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान और सच्चे देशभक्त को खो दिया है। अब स्वर्ग में ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गूंजेगा।”
कौन थे पीयूष पांडे?
- जन्म: 1955, जयपुर (राजस्थान)
- परिवार: बहन – गायिका एवं अभिनेत्री इला अरुण, भाई – निर्देशक प्रसून पांडे
- पृष्ठभूमि: पिता बैंक कर्मचारी, खुद ने क्रिकेट भी खेला और फिर विज्ञापन की दुनिया में कदम रखा
- करियर: ओगिल्वी इंडिया के चीफ क्रिएटिव ऑफिसर और ग्लोबल चीफ क्रिएटिव एडवाइज़र तक का सफर तय किया
