श्राद्ध पक्ष पूर्वजों को स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए सबसे पवित्र समय माना गया है। धर्मग्रंथों के अनुसार श्राद्ध केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि श्रद्धा, सात्विकता और संयम का पर्व है। लेकिन कई बार जानकारी की कमी से लोग ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे श्राद्ध का फल अधूरा रह जाता है।
आमतौर पर की जाने वाली गलतियां और उनका प्रभाव
- अशुद्ध अवस्था में श्राद्ध: स्नान किए बिना, अशुद्ध वस्त्रों में या जल्दबाज़ी में किए गए कर्म पितरों को तृप्त नहीं कर पाते। इसलिए स्वच्छता और सात्विकता ज़रूरी है।
- वर्जित भोजन का प्रयोग: श्राद्ध भोज में प्याज, लहसुन, बैंगन, मसूर दाल और मांसाहार का प्रयोग निषिद्ध है। इसके स्थान पर ताज़ा और सात्विक भोजन ही तैयार किया जाना चाहिए।
- कलह और क्रोध: श्राद्ध दिवस पर परिवार में झगड़ा या अपशब्द बोलना पितरों की अप्रसन्नता का कारण बन सकता है। इस दिन घर का वातावरण सौहार्दपूर्ण और शांत रखना आवश्यक है।
- दान में दिखावा: केवल परंपरा निभाने या दिखावे के लिए किया गया दान निष्फल होता है। सच्चे भाव से भोजन, अन्न या वस्त्र दान करने पर ही पितरों को संतोष मिलता है।
- समय का पालन न करना: श्राद्ध का उत्तम समय दोपहर माना गया है। इसे सुबह-सुबह या देर शाम करने से फल अधूरा रह जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध में सही विधि और सच्ची निष्ठा का पालन करने से ही पितरों की तृप्ति होती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
