बिलासपुर। हाई कोर्ट ने नौ साल पुराने टिफिन बम मामले में दो ग्रामीणों को बरी कर दिया है। जस्टिस संजय एस अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि “संदेह कभी सबूत का स्थान नहीं ले सकता”। कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी और बरामदगी की कहानी विरोधाभासी बयानों पर टिकी थी।
मामला 14 सितंबर 2015 का है। पुलिस का दावा था कि गश्त के दौरान भद्रीमहू गांव के पास झाड़ियों के पीछे दो ग्रामीण मिले, जिन्हें टिफिन बम रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। जांच अधिकारी के अनुसार, बम उसी स्थान से बरामद हुआ, जबकि कांस्टेबल ने बताया कि यह लगभग एक किलोमीटर दूर सड़क किनारे गड्ढे से मिला।
स्पेशल कोर्ट ने पहले ही पुलिस के बयानों में इस तरह के विरोधाभास को देखते हुए दोनों ग्रामीणों को आरोपमुक्त कर दिया था। कोर्ट ने एफआईआर और अधिकारियों के बयानों पर भी सख्त टिप्पणी की थी। राज्य सरकार ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।
