रायपुर | 30 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और कथित धर्मांतरण से जुड़े बहुचर्चित मामले में गिरफ्तार दो ननों को सेशन कोर्ट से भी जमानत नहीं मिल सकी। अब यह मामला बिलासपुर स्थित NIA कोर्ट को सौंपा जाएगा, क्योंकि सेशन कोर्ट ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है।

अदालत का फैसला
विशेष न्यायाधीश अनीश दुबे (FTSC) ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चूंकि मामला मानव तस्करी से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी सुनवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत द्वारा की जानी चाहिए। इससे पहले लोअर कोर्ट में भी जमानत याचिका खारिज की जा चुकी थी।
पीड़िता की तरफ से अधिवक्ता राजकुमार तिवारी ने अब NIA कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी शुरू कर दी है। तब तक के लिए दोनों ननें जेल में न्यायिक हिरासत में रहेंगी।
कैसे शुरू हुआ मामला?
यह पूरा घटनाक्रम 25 जुलाई को सामने आया जब दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने केरल की दो ननों और एक युवक को तीन आदिवासी लड़कियों के साथ रोका। आरोप लगाया गया कि ये लड़कियां नारायणपुर जिले से लाई गई थीं और उन्हें नर्सिंग की ट्रेनिंग और नौकरी का झांसा देकर आगरा ले जाया जा रहा था।
आरोप था कि यह सिर्फ रोजगार का वादा नहीं बल्कि जबरन धर्मांतरण की साजिश थी। मौके पर प्रदर्शन के बाद तीनों को रेलवे पुलिस (GRP) के हवाले कर दिया गया।
पुलिस की कार्रवाई
GRP ने मामले की जांच कर तीनों आरोपियों के खिलाफ धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा 4 और मानव तस्करी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। इसके बाद उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
अब आगे क्या?
मामला अब NIA कोर्ट में स्थानांतरित होने जा रहा है, जहां तफ्तीश और कानूनी प्रक्रिया अगले चरण में पहुंचेगी। इस केस ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बहस को जन्म दिया है, और अब सभी की नजरें बिलासपुर NIA कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
