नागपुर। विजयादशमी का पर्व इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के लिए ऐतिहासिक रहा। ठीक 100 साल पहले जिस दिन नागपुर में संघ की नींव रखी गई थी, उसी दिन आज RSS ने शताब्दी वर्ष का भव्य उत्सव मनाया। नागपुर में आयोजित मुख्य समारोह में 21 हजार स्वयंसेवक शामिल हुए, जबकि मंच पर मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन से की और फिर अपने संबोधन में पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप के टैरिफ, नक्सलवाद, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर बेबाकी से विचार रखे।
पहलगाम हमला और सेना का शौर्य
भागवत ने कहा कि कुछ महीने पहले पहलगाम में आतंकी वारदात हुई थी, जहां आतंकियों ने धर्म पूछकर निर्दोष हिंदुओं की हत्या कर दी। इस घटना ने साफ कर दिया कि हमारे दोस्त कौन हैं और दुश्मन कौन। उन्होंने कहा, “हमारी सेना ने जिस तरह जवाब दिया, उसे पूरी दुनिया ने देखा और भारतीय नेतृत्व की दृढ़ता भी सामने आई।”
नक्सलवाद पर चोट, ‘संवैधानिक उग्रवादियों’ का जिक्र
संघ प्रमुख ने देश के भीतर मौजूद “संवैधानिक उग्रवादी तत्वों” का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार की सख्त कार्रवाई और लोगों में बढ़ती जागरूकता के चलते नक्सलवाद अब काबू में है। मगर इन इलाकों में न्याय, विकास और सहानुभूति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक योजना की ज़रूरत है।
आत्मनिर्भरता और वैश्विक संदेश
भागवत ने कहा कि दुनिया में इस समय उथल-पुथल का दौर है और सबकी निगाहें भारत पर हैं। नियति चाहती है कि भारत ही दुनिया को नया रास्ता दिखाए। उन्होंने जोर दिया कि स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का कोई विकल्प नहीं है। भारत को अपनी इच्छानुसार कार्य करने के लिए आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनना होगा।
विविधता पर हमला करने वालों को चेतावनी
अपने भाषण में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। मगर आज इस विविधता को भेदभाव और टकराव में बदलने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज में फैल रही “अराजकता की राजनीति” को पहचानें और रोकें। भागवत बोले, “हम सब अलग नहीं हैं, पूजा-पद्धति चाहे कोई भी हो, सबका सम्मान होना चाहिए।”
गांधी, शास्त्री और गुरु तेग बहादुर का स्मरण
संघ प्रमुख ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और गुरु तेग बहादुर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि गांधी का योगदान अविस्मरणीय है, शास्त्री सादगी और दृढ़ता के प्रतीक थे, जबकि गुरु तेग बहादुर ने समाज की रक्षा के लिए बलिदान दिया।
